राजस्थान के प्रमुख धार्मिक स्थल | Rajasthan ke pramukh dharmik sthal in hindi pdf

Rajasthan ke pramukh Dharmik sthal

राजस्थान के प्रमुख धार्मिक स्थल : यदि आप राजस्थान में किसी भी भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो आपको राजस्थान के धार्मिक स्थलों rajasthan ke pramukh dharmik sthal के बारे में जानकारी होनी ही चाहिए क्यों की इस टॉपिक से हर भर्ती परीक्षा में प्रश्न जरूर पूछे जाते है।

राजस्थान में आगामी रीट मुख्य भर्ती परीक्षा (अध्यापक ग्रेड थर्ड) के पाठयक्रम में इस टॉपिक (राजस्थान के प्रमुख धार्मिक व दर्शनीय स्थल) को राजस्थान के सामान्य ज्ञान वाले सेक्शन में जोड़ा गया है। जिससे यह कन्फर्म हो जाता है की इस टॉपिक (rajasthan ke dharmik sthal) से क्वेश्चन जरूर से पूछे जाएंगे।

राजस्थान में प्रमुख धार्मिक स्थलों की बात करें तो पता चलता की राजस्थान में लगभग 100 से अधिक धार्मिक स्थल है। राजस्थान के लगभग हर जिले में 2 – 3 से अधिक धार्मिक स्थल स्थित है, इन धार्मिक स्थलों में लोगों की अपनी मान्यता है व सभी लोगों की अपनी इनके साथ पूर्ण श्रद्धा है। आज की इस पोस्ट में हम राजस्थान के कुछ प्रमुख धार्मिक स्थलों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।

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राजस्थान के प्रमुख धार्मिक स्थल

राजस्थान में प्रदेश के हर कोने में कोई न कोई धार्मिक स्थल स्थित हैं जिनसे लोगो की आस्था किसी ना किसी रूप से जुड़ी हुई हैं। नीचे राजस्थान के प्रमुख धार्मिक स्थलों का विवरण दिया गया है

अक्षरधाम मंदिर – जयपुर

  • भगवान नारायण को समर्पित यह मंदिर सुन्दर वास्तुकला के कारण प्रसिद्ध है।
  • जिसमें शानदार अर्च विग्रह , प्रतिमाएं और कलात्मक नक्काशी शामिल हैं।

अमरेश्वर महादेव – सवाई माधोपुर

  • ऊँची पहाड़ियों के बीच बसा पवित्र अमरेष्वर महादेव मंदिर का स्थान रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान के मार्ग में आता है। 
  • यहाँ शिवलिंग स्थापित है। 
  • कई भक्त यहाँ आकर, भगवान महादेव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

बेणेष्वर मंदिर – डूंगरपुर

  • सोम व माही नदियों में डुबकी लगाने के बाद, बेणेश्वर मंदिर में भगवान शिव की आराधना करने के लिए भक्तगण समर्पण के भाव से आते हैं। 
  • इस अंचल के सर्वाधिक पूजनीय शिवलिंग बेणेश्वर मंदिर में स्थित है। 
  • सोम और माही नदियों के तट पर स्थित पांच फीट ऊँचा ये स्वयंभू शिवलिंग शीर्ष से पांच हिस्सों में बंटा हुआ है।

भर्तृहरि मंदिर – अलवर

  • अलवर के लोक देवता भर्तृहरी जी एक राजा थे। उनके जीवन के अन्तिम वर्ष यहीं बीते थे।
  • महाराजा जयसिंह ने 1924 में भर्तृहरी जी के मंदिर को नया स्वरूप दिया।

ब्रह्मा मंदिर – पुष्कर

  • पूरे विश्व का एक मात्र ब्रह्मा मंदिर, पुष्कर में स्थित है। 
  • संगमरमर से निर्मित, चाँदी के सिक्कों से जड़ा हुआ, लाल शिखर और हंस (ब्रह्मा जी का वाहन) की छवि, वाले मंदिर में ब्रह्मा जी की चतुर्मुखी प्रतिभा, गर्भगृह में स्थापित है। 

देशनोक करणी माता मंदिर – बीकानेर

  • दुनियां भर में चूहों के लिए अपनी पहचान बनाने वाला मंदिर, बीकानेर से 30 कि.मी. की दूरी पर, देशनोक गाँव में है। 
  • यह पर्यटकों में ’टैम्पल ऑफ़ रैट्स’ के नाम से मशहूर है। यहाँ लगभग 25,000 काले चूहे हैं, जिन्हें ’कबा’ कहते हैं। 
  • गर्भगृह में करणी माता की मूर्ति स्थापित है। करणी माता मंदिर का द्वार सफेद संगमरमर से बनी एक सुन्दर संरचना है।

द्वारकाधीष मंदिर – झालावाड़

  • झालावाड़ शहर के संस्थापक झाला जालिम सिंह ने 1796 ई. में गोमती सागर झील के किनारे यह मंदिर बनवाया था । 
  • सन् 1806 ई. में यहाँ भगवान कृष्ण की मूर्ति की स्थापना की गई थी।

नागदा   –   उदयपुर

  • छठी शताब्दी के अंश को समाहित किए, नागदा उदयपुर से 22 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। 
  • अरावली की पहाड़ियों की गोद में बसा नागदा, जटिल नक्काशीदार ‘‘सहस्त्रबाहु मंदिर’’ के लिए प्रसिद्ध है जो कि आम लोगों में ‘सास बहू मंदिर’’ के नाम से पहचाना जाता है।

लाल मंदिर  – माउंट आबू

  • दिलवाड़ा या देलवाड़ा रोड पर, देलवाड़ा जैन मंदिर के समीप ही यह छोटा मंदिर है जो कि भगवान शिव को समर्पित है। 
  • यह मंदिर बहुत ही शांतिपूर्ण परिवेश प्रदान करता है और माउण्ड आबू में स्थित सभी पवित्र स्थलों में से सबसे ज्यादा पुराना माना जाता है।

विठ्ठल देव मंदिर  – बांसवाड़ा

  • बांसवाड़ा से कुछ किलोमीटर दूर विठ्ठल देव मंदिर स्थित हैं। 
  • सुंदर लाल रंग की संरचना वाला यह मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है। 

विष्णु मंदिर  – बाड़मेर

  • इस मन्दिर को पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बनाने में इसकी वास्तुकला तथा आस पास के बाजार का सहयोग मिला। 
  • खेड़ गाँव में स्थित यह विष्णु मन्दिर, हालांकि कई जगह से खण्डित हो रहा है, लेकिन आज भी इसके चारों तरफ एक भव्य आभा दिखाई देती है।

वराह मंदिर  – पुष्कर

  • वराह मंदिर पुष्कर का सबसे बड़ा और सबसे प्राचीन मंदिर है। 
  • 12वीं शताब्दी के शासक राजा आनाजी चौहान द्वारा निर्मित यह मंदिर भगवान विष्णु के तीसरे अवतार वराह को समर्पित हैं।

त्रिपुरा सुंदरी – डूंगरपुर

  • बांसवाड़ा – डूंगरपुर मार्ग पर 19 किमी दूरी पर तलवाडा ग्राम के समीप उमराई गांव में स्थित माँ त्रिपुरा सुन्दरी का प्राचीन मन्दिर है। 
  • मंदिर के उत्तरी भाग में सम्राट कनिष्क के समय का एक शिवलिंग होने से कहा जाता है कि यह स्थान कनिष्क के पूर्वकाल से ही प्रतिष्ठित है।

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अजमेर शरीफ दरगाह – अजमेर

  • अजमेर में दरगाह के अलावा भी बहुत से दर्शनीय स्थल हैं। 
  • अजमेर में सर्वाधिक देशी व विदेशी पर्यटक ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर मन्नत मांगने तथा मन्नत पूरी होने पर चादर चढ़ाने आते हैं। 
  • सभी धर्मों के लोगों में ख़्वाजा साहब की बड़ी मान्यता है।

श्री गोगा जी मंदिर – हनुमानगढ़

  • इस मंदिर को हिन्दू तथा मुस्लिम दोनों सम्प्रदाय के लोग मानते हैं। 
  • हिन्दू गोगाजी को गोगा जी देवता तथा मुस्लिम इन्हें गोगा पीर कहते हैं। 
  • हनुमानगढ़ से लगभग 120 किलोमीटर दूर, श्री गोगाजी का मंदिर स्थित है। किंवदंती प्रचलित है कि गोगाजी एक महान योद्धा थे

तलवाड़ा मंदिर – बांसवाड़ा

  • शिल्प नगर तलवाड़ा में त्रिपुरा सुन्दरी मार्ग पर स्थित सिद्धि विनायक मंदिर आस्था का प्रमुख केन्द्र है। 
  • इसे ’आमलीया गणेश’ के नाम से जाना जाता है। बुधवार एवं सकंट चतुर्थी को श्रृद्धालु आते हैं। 
  • यहाँ सूर्य मंदिर, महालक्ष्मी मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर, राम मंदिर प्रमुख है।

सूर्य मंदिर – झालावाड़

  • झालावाड़ का दूसरा जुड़वां शहर है झालरापाटन, जिसे ‘सिटी ऑफ बैल्स’ यानि “घंटियों का शहर” भी कहा जाता है। यहीं पर बना है सूर्य मंदिर। 
  • यहाँ पर बहुत से मंदिर होने के कारण सुबह शाम मंदिरों की घंटियों की स्वर लहरी सुनाई देती है। 10वीं शताब्दी में बना 17 फीट ऊँचा भगवान शिव को समर्पित सूर्य मंदिर, झालरापाटन के सर्वाधिक मनोहारी मंदिरों में से एक है।

सीताबाड़ी  –  बारां

  • सीता माता और लक्ष्मण को समर्पित यह मन्दिर, बारां से 45 कि.मी. दूर है तथा ऐसी मान्यता है कि भगवान राम और सीता के दोनों पुत्र लव और कुश का जन्म यहीं पर हुआ था। 
  • इसमें कई कुण्ड भी हैं जैसे-वाल्मीकि कुण्ड, सीता कुण्ड, लक्ष्मण कुण्ड, सूर्य कुण्ड आदि।

श्री चारभुजानाथ मंदिर – भीलवाड़ा

  • भीलवाड़ा आने वाले कई पर्यटक राजसमंद जाते हैं जहां श्री चारभुजानाथ मंदिर स्थित है। 
  • भीलवाड़ा से एक सुविधाजनक दूरी पर कोटड़ी तहसील में स्थित यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है।

श्रीनाथजी मंदिर  – डूंगरपुर

  • भगवान कृष्ण का यह मंदिर तीन मंजिला कक्ष में है, जो यहाँ स्थित तीनों मंदिरों के लिए गोध मंडप, एक सार्वजनिक कक्ष है। 
  • 1623 में महाराज पुंजराज ने इस मंदिर का निर्माण कराया। 
  • इसका प्रमुख आकर्षण श्री राधिकाजी और गोवर्धननाथ जी की मूर्तियां है।

रानी सती मंदिर  –  झुंझुनूं

  • रानी सती मंदिर राजस्थान में झुझंनू जिले में स्थित विख्यात मंदिर है। 
  • इस मंदिर का इतिहास 400 से अधिक वर्षों का है। 
  • स्त्री शक्ति का प्रतीक यह मंदिर अपनी गरिमा और असाधारण चित्रों के लिए जाना जाता है।

रणकपुर जैन मंदिर – पाली

  • प्राकृतिक सौन्दर्य के बीच, घाटियों से घिरा यह भव्य मंदिर, जैन समुदाय के लिए बड़ा तीर्थस्थल है। 
  • हीरे जैसे चमकते और तरासे गए यह मंदिर अलौकिक, अद्भुत और अद्वितीय हैं। एक जैन व्यापारी के पास दिव्य दृष्टि होने की मान्यता के बाद 15वीं शताब्दी में निर्मित, रणकपुर जैन मंदिर आदिनाथ को समर्पित है।

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर – करौली

  • करौली के एक गांव मेहंदीपुर में बालाजी, यानि हनुमान जी के मंदिर की काफी दूर दूर तक मान्यता है। 
  • मान्यता के अुनसार पागल और बीमार लोग यहाँ लाए जाते हैं और बालाजी के आशीर्वाद से अधिकतर ठीक होकर जाते हैं। 

मीराबाई मंदिर  –  चितौड़गढ़

  • इस मंदिर का स्वरूप उत्तर भारतीय शैली में मीरां बाई के पूजा स्थल के रूप में किया गया था। 
  • इसकी विविधता, इसकी कोणीय छत है, जिसे दूर से ही देखा जा सकता है।

किराड़ू मन्दिर – बाड़मेर

  • थार के रेगिस्तान में चमकते लाल माणक जैसे मन्दिर। 
  • शहर से यह मन्दिर लगभग 35 कि.मी. दूर है, जिन्हें आप जाकर देखें तो देखते ही रह जाएँ। 
  • सोलंकी वास्तुकला शैली में उभरे, कंगूरे, स्तम्भ और पत्थर पर की गई बारीक नक़्काशी का काम-इन मन्दिरों को भगवान शिव को समर्पित किया गया है।

कैला देवी मन्दिर – करौली

  • करौली के बाहरी इलाके में लगभग 25 किमी दूरी पर कैला देवी का प्रसिद्ध मन्दिर है जो कि त्रिकुट की पहाड़ियों के बीच कालीसिल नदी के किनारे पर बना हुआ है। 
  • यह मन्दिर देवी के नौ शक्ति पीठों में से एक माना जाता है तथा इसकी स्थापना 1100 ईस्वी में की गई थी, ऐसी मान्यता है। 

दिगंबर जैन मंदिर – जयपुर

  • जयपुर का प्राचीन दिगम्बर जैन मंदिर शहर से 14 किमी दूर सांगानेर में स्थित है। 
  • संघीजी मंदिर में प्रमुख विग्रह भगवान आदिनाथ पद्मासन (कमल स्थिति) मुद्रा में है। यह आकर्षक नक्काशियों से बना लाल पत्थर का मंदिर है। …

FAQ Rajasthan ke pramukh Dharmik sthal

राजस्थान में कुल कितने धार्मिक स्थल है?

वर्तमान में राजस्थान में लगभग हर जिले में दो से तीन धार्मिक स्थल स्थित है। लगभग 100 से अधिक प्रमुख धार्मिक स्थल स्थित है।

राजस्थान में धार्मिक स्थल और पर्यटन स्थल समान है क्या?

धार्मिक स्थल वह स्थान होते हैं जहां लोग अपनी श्रद्धा और धर्म आदि कार्य के लिए आते हैं जबकि पर्यटन स्थल में यह सभी स्थल आते हैं जहां कोई भी व्यक्ति किसी भी स्थल पर घूमने के लिए जा सकता है।

राजस्थान का प्रसिद्ध वराह मंदिर कहां स्थित है?

वराह मंदिर राजस्थान के पुष्कर में स्थित है

राजस्थान का प्रसिद्ध किराडू मंदिर कहां स्थित है?

किराडू मंदिर राजस्थान के बाड़मेर में स्थित है यह भगवान शिव को समर्पित प्रसिद्ध मंदिर है।

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