राजस्थान के प्रतीक चिन्ह | Rajasthan ke Pratik chinh pdf

राजस्थान के प्रतीक चिन्ह
Rajasthan ke Pratik chinh

राजस्थान के प्रतीक चिन्हों से संबंधित प्रश्न राजस्थान के प्रत्येक एग्जाम में पूछे जाते हैं यदि आप यदि आप राजस्थान के किसी भी भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो राजस्थान जीके विषय में आपको यह Topic राजस्थान के प्रतीक चिन्ह देखने को मिलेगा।

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Rajasthan ke Pratik chinh pdf: आज हम राजस्थान के प्रतीक चिन्ह को देखेंगे और उन को विस्तार पूर्वक जानेंगे। राजस्थान तृतीय श्रेणी अध्यापक भर्ती परीक्षा 2022 में राजस्थान के प्रतीक चिन्ह से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे तो यदि आप इस भर्ती की तैयारी कर रहे हैं तो इन प्रतीक चिन्ह के बारे में आपका जानना बहुत जरूरी है अंत में आपको राजस्थान के प्रतीक चिन्ह

Table of Contents

राज्य वृक्ष – “खेजड़ी”

वानस्पतिक नाम – प्रोसोपिस सिनेरेरिया

खेजड़ी को “राजस्थान का गौरव”, “राजस्थान का कल्प वृक्ष”, “राजस्थान का कल्पतरु”, “थार का कल्पवृक्ष”, “रेगिस्तान का गौरव”, “शमी”, “जांटी”, “खेजरी” आदि नामों से जाना जाता है।

राजस्थान राजस्थान का राज्य वृक्ष – खेजड़ी

खेजड़ी वृक्ष के विभिन्न उपनाम

  • खेजड़ी को स्थानीय भाषा में – जांटी
  • राजस्थानी भाषा में – सिमलो
  • ग्रंथों में – शमी
  • वैज्ञानिक भाषा में – प्रोसोपिस सिनेररिया ,
  • सिंधी भाषा में – छौकड़ो
  • कन्नड़ भाषा में – बन्नी
  • तमिल भाषा में – पेयमेय
  • बंगाली भाषा में – शाईगाछ

खेजड़ी को Wonder Tree व भारतीय मरूस्थल का सुनहरा वृक्ष भी कहा जाता है।

राजस्थान में खेजड़ी के सर्वाधिक वृक्ष शेखावटी क्षेत्र में देखे जा सकते है। इसके अलावा खेजड़ी के सर्वाधिक वृक्ष नागौर जिले में देखे जाते है।

वैज्ञानिकों ने खेजड़ी के वृक्ष की आयु पांच हजार वर्ष बताई है।

खेजड़ी वृक्ष की हरी पत्तियों को लूम / लुंग, हरी फली (फल) को सांगरी कहते हैं जिसकी सब्जी भी की जाती, इसकी सुखी फली को खोखा कहा जाता है।

खेजड़ी का पुष्प मीझर कहलाता है।

खेजड़ी के वृक्ष को सेलेस्ट्रेना व ग्लाइकोट्रमा नामक कीड़े नुकसान पहुंचा रहे है।

राजस्थान के प्रतीक चिन्ह में खेजड़ी वृक्ष से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारी

  • खेजड़ी को राज्य वृक्ष का दर्जा 31 अक्टूबर, 1983 में दिया गया था।
  • 5 जून 1988 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर खेजड़ी वृक्ष पर 60 पैसे का डाक टिकट जारी किया गया था।
  • खेजड़ी के वृक्ष की पूजा विजया दशमी / दशहरे (आश्विन शुक्ल पक्ष-10) के अवसर पर की जाती है।
  • खेजड़ी को विश्नोई सम्प्रदाय में शमी के नाम से जाना जाता है।
  • खेजड़ी दिवस 12 सितंबर 1978 से प्रतिवर्ष मनाया जाता है ।
  • खेजड़ी वृक्ष को बचाने के लिए प्रथम बलिदान अमृता देवी बिश्नोई ने 1730 में 363 (69 महिलाएँ व 294 पुरूष) लोगों के साथ जोधपुर के खेजडली ग्राम या गुढा बिश्नोई गांव में भाद्रपद शुक्ल दशमी को दिया।
  • भाद्रपद शुक्ल पक्ष की दशमी को तेजादशमी के रूप में मनाया जाता है।
  • भाद्रपद शुक्ल दशमी को विश्व का एकमात्र वृक्ष मेला खेजड़ली गांव में लगता है।
  • अमृता देवी के पति का नाम रामो जी बिश्नोई था।
  • बिश्रोई संप्रदाय के द्वारा दिया गया यह बलिदान साका या खड़ाना कहलाता है।
  • इस बलिदान के समय जोधपुर का राजा अभयसिंह था।
  • अभय सिंह के आदेश पर गिरधर दास के द्वारा 363 लोगों की हत्या की गई।
  • वन्य जीवों के संरक्षण के लिए दिये जाने वाला सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार अमृता देवी वन्य जीव पुरस्कार है।
  • अमृता देवी वन्य जीव पुरस्कार की शुरूआत 1994 में की गई।
  • यह प्रथम पुरस्कार गंगाराम बिश्रोई (जोधपुर) को दिया गया।
  • खेजड़ली आन्दोलन चिपको आन्दोलन का प्रेरणा स्त्रोत रहा है।
  • चिपको आन्दोलन उत्तराखण्ड में सुंदरलाल बहुगुणा के नेतृत्व में हुआ।
  • तेलंगाना का राज्य वृक्ष खेजड़ी (जरमेटी) है।
  • 1999 में खेजड़ी वृक्ष को बचाने के लिए ऑपरेशन खेजड़ा कार्यक्रम शुरू किया गया।

राज्य पक्षी – “गोडावण”

Rajasthan ke Pratik chinh pdf: गोडावण (Great Indian Bustard -GIB) राजस्थान का राजकीय पक्षी है।यह मुख्यतया भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाने वाला एक विशाल पक्षी है तथा विश्व में पाए जाने वाली सबसे बड़ी उड़ने वाली पक्षी प्रजातियों में से एक है।वर्तमान समय में गोडावण या ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (Great Indian Bustard -GIB) अपने निवास स्थान के क्षरण और अवैध शिकार के कारण संकटग्रस्त है।

राजस्थान राजस्थान का राज्य पक्षी – गोडावण

यह भारत में ‘वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972’ की अनुसूची-1 के तहत संरक्षित है।जबकि ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (Great Indian Bustard -GIB) को अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (International Union for Conservation of Nature-IUCN) की रेड लिस्ट में गंभीर रूप से संकटग्रस्त (Critically Endangered) की श्रेणी में रखा गया है।

गोडावण के बारे महत्वपूर्ण जानकारी

  • गोडावण को अंग्रेजी में “ग्रेट इण्डियन बस्टर्ड” कहा जाता है। 
  • गोडावण को स्थानीय भाषा में “सोहन चिड़ी”, “शर्मिला पक्षी” कहा जाता है।
  • गोडावण के अन्य उपनाम- सारंग, हुकना, तुकदर, बड़ा तिलोर व गुधनमेर है। 
  • गोडावण को हाडौती क्षेत्र में मालमोरड़ी कहा जाता है। 
  • गोडावण को राज्य पक्षी का दर्जा 21 मई, 1981 में मिला।
  • गोडावण मुख्यत: अफ्रीका का पक्षी है।
  • राजस्थान में गोडावण सर्वाधिक तीन क्षेत्रों में पाया जाता है- सोरसन (बारां), सोंकलिया (अजमेर), मरूद्यान(जैसलमेर, बाड़मेर)।
  • गोडावण राजस्थान के अलावा गुजरात में भी देखा जा सकता है।
  • गोडावण, शुतुरमुर्ग की तरह दिखाई देता है।
  • गोडावण की कुल ऊंचाई लगभग 4 फीट होती है।
  • गोडावण के ऊपरी भाग का रंग पीला तथा सिर के ऊपरी भाग का रंग नीला होता है।
  • इसका प्रिय भोजन मूंगफली व तारामीरा है।
  • गोडावण के प्रजनन हेतु जोधपुर जन्तुआलय प्रसिद्ध है।
  • गोडावण का प्रजनन काल अक्टूबर, नवम्बर का महिना माना जाता है।
  • 2011 में की IUCN की रेड डाटा लिस्ट में इसे Critically Endangered (संकटग्रस्त प्रजाति) प्रजाति माना गया है।
  • गोडावण के संरक्षण हेतु राज्य सरकार ने विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 2013 को राष्टीय मरू उद्यान, जैसलमेर में प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड प्रारंभ किया।
  • यह प्रोजेक्ट प्रारंभ करने वाला राजस्थान, भारत का प्रथम राज्य है।
  • 1980 में जयपुर में गोडावण पर पहला अन्तराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया था।

राजस्थान का राज्य पुष्प – रोहिड़ा

  • वानस्पतिक नाम – टिकोमेला अन्डुलेटा
Rajasthan ka rajya pushp
राजस्थान का राज्य पुष्प – रोहिडा
  • अन्य नाम – मरुस्थल का सागवान, मारवाड़ टीक
  • रोहिड़ा को राजस्थान की ‘मरुशोभा’ कहा जाता है।
  • रोहिड़ा के फूल को 21 अक्टूबर 1983 को राजस्थान सरकार ने राज्य पुष्प घोषित किया था। 
  • राजस्थान में यह जैसलमेर, जोधपुर, पाली, अजमेर, नागौर, बीकानेर, चूरू, झुंझुनू, सीकर आदि जिलों में सर्वाधिक मिलता है।

राजस्थान का राज्य पशु – चिंकारा तथा ऊँट

  • राजस्थान में राज्य पशु की दो श्रेणियाँ हैं –
    1. जंगली पशु
    2. पालतू पशु

राजस्थान का राज्य पशु – (जंगली पशु – चिंकारा)

  • वैज्ञानिक नाम -गज़ेला बेनेट्टी (Gazella bennettii)
  • चिंकारा को छोटा हिरन के उपनाम से भी जाना जाता है।
Rajasthan ka rajya pashu chinkara
राजस्थान का राज्य पशु – चिंकारा
  • यह “एन्टीलोप” प्रजाती का एक मुख्य जीव है। राजस्थान के जंगली पशु की श्रेणी में इसे राज्य पशु की उपाधि प्राप्त है।
  • चिंकारा को 1981 में राज्य पशु घोषित किया गया।
  • राजस्थान में जयपुर का नाहरगढ़ अभ्यारण्य चिंकारा के लिए प्रसिद्ध है।
  • यह एक शर्मीला जीव है तथा सर्वाधिक राजस्थान के ‘मरू भाग’ में पाया जाता है।

राजस्थान का राज्य पशु – (पालतू पशु – ऊँट)

  • उपनाम – रेगिस्तान का जहाज
  • राजस्थान सरकार ने 30 जून 2014 को ऊँट को राजस्थान के राज्य पशु का दर्जा दिया गया जिसकी घोषणा 19 सितम्बर 2014 को बीकानेर में की गई। 
Rajasthan ka rajya pashu ऊंट
राजस्थान का राज्य पशु – (पशुधन श्रेणी) ऊंट
  • राजस्थान में सर्वाधिक ऊँटों वाला जिला बाड़मेर तथा सबसे कम वाला जिला प्रतापगढ़ है।
  • राजस्थान में ऊँटों की नस्लें – गोमठ ऊँट, नाचना ऊँट, जैसलमेरी ऊँट, अलवरी ऊँट, सिंधी ऊँट, कच्छी ऊँट, बीकानेरी ऊँट
  • राजस्थान के लोकदेवता पाबूजी को ऊंटो का देवता भी कहते है ।
  • राजस्थान में ऊँट पालने के लिए रेबारी जाति प्रसिद्ध है।
  • ऊँट की खाल पर की जाने वाली कलाकारी को उस्ता कला तथा ऊंट की खाल से बनाये जाने वाले ठण्डे पानी के जलपात्रों को कापी कहा जाता है।
  • ऊंटनी के दूध में भरपूर मात्रा में Vitamin C पाया जाता है। कार में स्थित उरमूल डेयरी भारत की एकमात्र ऊँटनी के दूध की डेयरी है।
  • गोरबंद राजस्थान का ऊँट श्रृंगार का गीत है।
  • ऊँट के नाक में डाले जाने वाला लकड़ी का बना आभूषण गिरबाण कहलाता है।
  • गंगासिंह ने पहले विश्वयुद्ध में ‘गंगा रिसाला’ नाम से ऊंटों की एक सेना बनाई थी जिसके पराक्रम को (पहले और दूसरे विश्वयुद्ध में) देखते हुए बाद में इसे बीएसएफ में शामिल कर लिया गया।

राजस्थान का राज्य खेल – बास्केटबाल (Basketball)

  • बास्केटबाल को 1948 में राज्य खेल घोषित किया गया।
Rajasthan ka rajya khel basketball
राजस्थान राजस्थान का राज्य खेल – बास्केटबॉल
  • इस खेल में 5 सक्रिय खिलाड़ी वाली दो टीमें होती हैं
  • इस खेल को नियंत्रित करने वाली संस्था “अन्तर्राष्ट्रीय बास्केटबॉल संघ” (International Basketball Federation, FIBA) है।

राजस्थान का राज्य नृत्य – घूमर (Ghoomar)

  • यह राजस्थान का परंपरागत लोकनृत्य है। जिसमें केवल स्त्रियाँ ही भाग लेती हैं।
  • इस नृत्य में महिलाएं एक बड़ा घेरा बनाते हुए अन्दर और बाहर जाते हुए नृत्य करती हैं।
राजस्थान का राज्य नृत्य घूमर
राजस्थान का राज्य नृत्य – घूमर
  • घूमर को राज्य की आत्मा के उपनाम से जाना जाता है।
  • घूमर नृत्य की उत्पति मूलत: मध्य एशिया भरंग नृत्य / मृग नृत्य से हुई है।
  • घूमर नृत्य मांगलिक अवसरों, तीज, त्यौहारों पर आयोजित होत
  • श्रृंगार रस से सम्बंधित यह नृत्य गुजरात के गरबा नृत्य से सम्बंधित है।
  • इस नृत्य को राजस्थान लोक नृत्यों का सिरमौर, राजस्थान के नृत्यों की आत्मा,महिलाओं का सर्वाधिक लोकप्रिय नृत्य, रजवाड़ी/सामंतशाही लोक नृत्य कहा जाता है।
  • घूम (घुम्म)- घूमर नृत्य के दौरान लहंगे के घेर को घूम कहते है।
  • सवाई- घूमर के साथ लगाया जानेवाला अष्टताल कहरवा सवाई कहलाता है।
  • मछली नृत्य- यह नृत्य घूमर नृत्य का एक भाग।
  • घूमर के तीन रूप है
  • * झुमरिया- बालिकाओं द्वारा किया जाने वाला नृत्य।
  • * लूर- गरासिया जनजाति की स्त्रियों द्वारा किया जाने वाला नृत्य। 
  • * घूमर- इसमें सभी स्त्रियां भाग लेती है।

राजस्थान का राजकीय गीत – केसरिया बालम

  • इस गीत को सर्वप्रथम उदयपुर की मांगी बाई के द्वारा गाया गया। कोर की मां
  • यह लोकगीत ढोला-मारू की प्रेम कहानी से जुड़ा हुआ है।
  • इस गीत को अन्तराष्ट्रीय स्तर पर बीकानेर की अल्ला जिल्ला बाई के द्वारा गाया गया।
  • अल्ला जिल्ला बाई को राज्य की मरूकोकिला और बाई जी के नाम से भी जाना जाता है। इस गीत को मांड गायिकी में गाया जाता है।
  • अल्ला जिल्ला बाई ने सबसे पहले केसरिया बालम बीकानेर महाराजा गंगासिंह के दरबार में गाया था।

राज्य मिठाई – घेवर

  • घेवर डिस्क के आकार राजस्थान की प्रसिद्ध मिठाई है। यह मिठाई यहां कई वर्षों से प्रसिद्ध है और अधिकतर त्योहारों जैसे मकर संक्रांति, गणगौर, तीज और रक्षा बंधन के दौरान इसकी मांग अधिक होती है। जयपुर का तीज उत्सव घेवर के बिना अधूरा माना जाता है।
राजस्थान की राज्य मिठाई घेवर
राजस्थान की राज्य मिठाई – घेवर
  • इसे बनाने में मैदा, देसी घी, दूध, केसर, इलायची पाउडर और चीनी का उपयोग किया जाता है। बाजार में घेवर के विविध प्रकार जैसे – रबड़ी घेवर, मलाई घेवर, मावा घेवर, पनीर घेवर आदि मिलते हैं।

राज्य लोक वाद्य यंत्र – अलगोजा

  • राजस्थान का ‘राज्य लोक वाद्य यंत्र’ “अलगोजा” है।
  • अलगोजा बांस से बना हुआ एक वायु वाद्य यंत्र होता है। 
  • यह राजस्थान का सबसे लोकप्रिय वाद्य यंत्र है। 
  • इस वाद्य यंत्र में लकड़ी से बने दो बांसुरी की एक जोड़ी होती है। 
  • यह यंत्र हवा के प्रवाह से बजता है। 
राजस्थान का राज्य लोक वाद्य यंत्र अलगोजा
राजस्थान का राज्य लोक वाद्य यंत्र – अलगोजा
  • दोनों बांसुरियों को युगल कहा गया है। 
  • लंबी बांसुरी पुरुष तथा छोटी बांसुरी महिला मानी जाती है।
  • वादक दो अलगोजे अपने मुँह में रखकर एक साथ बजाता है, एक अलगोजे पर स्वर कायम रखते हैं और दूसरे पर स्वर बजाये जाते है।
  • जयपुर के पदमपुरा गाँव के प्रसिद्ध कलाकार ”रामनाथ चौधरी“ नाक से अलगोजा बजाते हैं। 
  • अलगोजा जैसलमेर, जोधपुर, बाड़मेर, बीकानेर, जयपुर, सवाई माधोपुर एवं टोंक आदि क्षेत्रों में मुख्य रूप से बजाया जाता है।
  • अलगोजा को वीर तेजाजी की जीवन गाथा, डिग्गीपुरी का राजा, ढोला मारू नृत्य और चक्का भवाई नृत्य में भी बजाया जाता है।
  • इसका प्रयोग भील और कालबेलियाँ जातियाँ अधिक करती है।

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राजस्थान की राजभाषा हिंदी है

राजस्थान का राज्य शास्त्रीय नृत्य – कत्थक

राजस्थान के राज्य कवि – सूर्यमल्ल मिश्रण

राजस्थान के जिलों के शुभंकर

  1. अलवर – सांभर
  2. अजमेर – खडमौर पक्षी
  3. उदयपुर – कब्र बिज्जू
  4. करौली – घडिय़ाल
  5. कोटा – ऊदबिलाव
  6. भरतपुर – साइबेरियन सारस
  7. धौलपुर – पंचीरा (इंडियन स्क्रीमर)
  8. सवाईमाधोपुर – बाघ
  9. जैसलमेर – गोडावण
  10.  जोधपुर- कुरंजा पक्षी
  11.  बाड़मेर – मरू लोमड़ी / लौंकी
  12.  बीकानेर- भट्ट तीतर (बटबड)
  13.  श्रीगंगानगर – चिंकारा
  14.  हनुमानगढ़ – छोटा किलकिला
  15.  चूरू – काला हिरण 
  16.  झुंझुनू – काला तीतर
  17.  सीकर – शाहीन (बाज )
  18.  बारां- मगरमच्छ
  19.  बूंदी – सुर्खाब 
  20.  झालावाड़ – गागरोनी तोता
  21.  बांसवाड़ा – जल पीपी
  22.  डूंगरपुर – जांघिल
  23.  प्रतापगढ़ – उड़न गिलहरी
  24.  जयपुर – चीतल
  25.  दौसा – खरगोश
  26.  टोंक – हंस
  27.  राजसमंद – भेडिय़ा
  28.  भीलवाड़ा – मोर
  29.  चित्तौडग़ढ़ – चौसिंगा
  30.  नागौर – राजहंस
  31.  पाली – तेंदुआ
  32.  जालौर – भालू
  33.  सिरोही – जंगली मुर्गी

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