राजस्थान सरकार की फ्लैगशिप योजनाएं | Flagship schemes of Rajasthan Government

राजस्थान सरकार की फ्लैगशिप योजनाएं (Flagship schemes of Rajasthan Government) : फ्लैगशिप योजनाएं वे योजनाएं हैं जो स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण, सिंचाई, रोजगार, शहरी और ग्रामीण विकास और अन्य क्षेत्रों में या फिर सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के राष्ट्रीय मुद्दों को संबोधित करती हैं। फ्लैगशिप योजनाओं के माध्यम से सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थी तक पहुंचा जा सके वह इनके क्रियान्वयन व कार्य की प्रगति में भी सुधार हो सके तथा योजनाओं का लाभ उचित व्यक्ति तक समय तक पहुंच सके।

राजस्थान सरकार की फ्लैगशिप योजनाएं
राजस्थान सरकार की फ्लैगशिप योजनाएं

Flagship Schemes Rajasthan Government in Hindi: राजस्थान में विभिन्न प्रकार की योजनाएं वर्तमान समय में चल रही हैं जिनमें बहुत सी ऐसी योजनाएं हैं जो फ्लैगशिप कार्यक्रम के अंतर्गत भी शामिल की गई है आज के इस लेख में हम फ्लैगशिप कार्यक्रम में शामिल कुछ योजनाओं के बारे में जानने वाले हैं फ्लैगशिप कार्यक्रम या फ्लैगशिप योजनाओं से संबंधित प्रश्न आप की आगामी रीट भर्ती परीक्षा 2022 में पूछे जाएंगे।

इसलिए आपको राजस्थान सरकार द्वारा चलाई जा रही राजस्थान सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं के बारे में संपूर्ण जानकारी होनी चाहिए क्योंकि इससे संबंधित दो से तीन प्रश्न आपको एग्जाम में जरूर देखने को मिलेंगे।

Table of Contents

मुख्यमंत्री अन्न सुरक्षा योजना

इस योजना का शुभारम्भ दिनांक 10 मई, 2010 को किया गया। मुख्यमंत्री अन्न सुरक्षा योजना के तहत 1 रुपये प्रतिकिलो की दर (2 रुपये प्रतिकिलो की दर से घटाकर) से लगभग 38.83 लाख (एएवाई सहित) गरीब परिवारों को प्रभावी प्रबन्धन के साथ प्रतिमाह 25 किलो गेहूँ मिलना सुनिश्चित किया गया है। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा राजस्थान राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम की स्थापना की गई हैं।

इस योजना हेतु लगभग 500 करोड़ रूपये की वार्षिक सब्सिडी राज्य सरकार द्वारा प्रदान किये जाने की व्यवस्था की गयी है।

एपीएल परिवारों के लिए लोकप्रिय राज ब्रांड फोर्टीफाइड आटे की दर को 8.60 रू. प्रति किलो से घटा कर 5 रू. प्रति किलो किया गया है।

बी.पी.एल. परिवारों को उपलब्ध कराई जा रही चीनी की दर को 13.5 रू. प्रति किलो से घटा कर 10 रू. प्रति किलो किया गया है।

इस हेतु 350 करोड़ रूपये की राहत का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना

2 अक्टूबर 2011 से शुरू की गई मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना के अन्तर्गत राजकीय चिकित्सालयों में आने वाले सभी अंतरंग एवं बहिरंग रोगियों को आवश्यक दवा सूची में शामिल 713 प्रकार की दवाइयों, 181 सर्जिकल एवं 77 सूचर्स सहित कुल 971 औषधियां निःशुल्क उपलब्ध करवाई जाती हैं।राज्य के सभी चिकित्सा संस्थानों में दवा वितरण करने के लिए 33 जिला मुख्यालयों पर 40 जिला औषधि भंडार गृह स्थापित हैं। दवाइयों की अनुपलब्धता होने पर राजकीय चिकित्सालयों की मांग अनुसार स्थानीय स्तर पर क्रय कर दवा उपलब्ध करवाई जाती है। योजनान्तर्गत वित्तीय वर्ष 2021-22 में अगस्त तक 400 करोड़ रूपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं।

यह योजना सभी वर्गों के लिए एक समान रुप से लागू है। केवल बी.पी.एल. ही नहीं बल्कि सभी वर्गो के सभी मरीजों को निःशुल्क दवाइयां।

निःशुल्क दवाओं के वितरण हेतु कुल 16,053 दवा वितरण केन्द्र सभी राजकीय संस्थानों में बनाये गये है।

कम लागत में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं प्रदान की जा सकेंगी। आम जनता द्वारा उपचार पर होने वाले खर्च में कटौती होगी। धन की कमी के चलते अब कोई चिकित्सा सेवाओं से वंचित नहीं रहेगा।

2 अक्टूबर, 2011 से अब तक लगभग 11.27 करोड़ मरीज लाभान्वित हुए है।

वित्तीय वर्ष में 400 करोड़ रूपये का बजट प्रावधान रखा गया है।

मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना के अन्तर्गत मेडीकल कॉलेज से संबंधित अस्पताल में 400-450, जिला अस्पताल में 325-400, सी.एच.सी. में 150-250, पी.एच.सी. में 100-150 एवं उप केन्द्र में 20-30 दवाइयां, सर्जिकल्स एवं सूचर्स 16,053 वितरण केन्द्रों के माध्यम से निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे है।

निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही दवाईयों व सर्जिकल्स की संख्या 400 से बढ़ाकर 600 की जा रही है।

बालिकाओं, वृद्धजनों, विशेष योग्यजनों एवं गरीबों को योजना से सबसे ज्यादा फायदा मिला है। गत 1 वर्ष में इस योजना के क्रियान्वयन से गरीब जनता के 1591.9 करोड़ रूपये की शुद्ध बचत हुई है।

मुख्यमंत्री निःशुल्क जांच योजना-

7 अप्रेल, 2013 से राजकीय अस्पतालों में संपूर्ण उपचार उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से जनहित में मुख्यमंत्री निःशुल्क जांच योजना लागू की गई। यह है राजस्थान की flagship Schemes Rajasthan Government में शामिल प्रमुख योजना है।

चिकित्सा संस्थानों तथा मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध चिकित्सालयों में 90, जिला उपजिला, सेटेलाइट चिकित्सालयों में 56, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में 37 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों व डिस्पेंसरी चिकित्सालयों में 15 प्रकार की जांचें निःशुल्क उपलब्ध करवाईजा रही हैं। योजनान्तर्गत वित्तीय वर्ष 2021-22 में अगस्त तक 2 करोड़ 2 लाख से अधिक जांचे निःशुल्क की जा चुकी हैं।

मुख्यमंत्री निःशुल्क जांच योजना के अन्तर्गत दिनांक 7 अप्रेल, 2013 (विश्व स्वास्थ्य दिवस) से प्रथम चरण में चिकित्सा महाविद्यालयों से संबद्ध चिकित्सालयों, जिला चिकित्सालयों एवं सैटेलाईट चिकित्सालयों में ईसीजी, एक्स-रे, सोनोग्राफी एवं अन्य आवश्यक सामान्य जांचें व द्वितीय चरण में 1 जुलाई 2013 से सभी सामुदायिक केन्द्रों में ईसीजी, एक्सरें एवं अन्य आवश्‍यक सामान्य जांचें निःशुल्क उपलब्ध हैं।

सभी राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं संबद्ध चिकित्सालयों में 57 प्रकार की व जिला चिकित्सालयों, उप-जिला चिकित्सालयों एवं सैटेलाईट चिकित्सालयों में 44 प्रकार की जांचे निःशुल्क उपलब्ध है।

योजना में अब तक 67.93 लाख से ज्यादा निःशुल्क जांचें की गयी।

द्वितीय चरण में प्रदेश के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में ईसीजी, एक्स-रे एवं अन्य आवश्यक सामान्य जांचें 1 जुलाई, 2013 से आवश्‍यक जाँचें निःशुल्क उपलब्ध व तृतीय चरण में भी प्रदेश के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों एवं सिटी डिस्पेंसरियों में दिनांक 15 अगस्त, 2013 से आवश्यक जांचें निःशुल्क उपलब्ध कराई जायेंगी।

राजस्थान जननी शिशु सुरक्षा योजना

राजस्थान सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं में सरकार की जननी शिशु सुरक्षा योजना की शुरूआत 1 जून, 2011 को हरियाणा राज्य के मेवात जिले में यूपीए चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी के द्वारा की गई।

राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने की दिशा में राजस्थान सरकार ने भी 12 सितम्बर, 2011 से केन्द्र सरकार की जननी सुरक्षा योजना को राजस्थान सरकार ने पूर्ण तैयारी के साथ ‘राजस्थान जननी-शिशु सुरक्षा योजना‘ के रूप में प्रारम्भ की गई है।

जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के अन्तर्गत गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव, सिजेरियन ऑपरेशन द्वारा प्रसव, दवाइयां व अन्य उपयोग में आने वाली सामग्री, लैब जाँच सुविधाएं, गर्म भोजन, रक्त सुविधा व परिवहन की सुविधाएं निःशुल्क प्रदान की जा रही है। यह सभी सेवाएं यूजर चार्जेज मुक्त होगी। इसके अतिरिक्त बीमार नवजात शिशुओं के लिये (30 दिवस तक) ईलाज, दवाइयां व अन्य उपयोग में आने वाली सामग्री, लैब जाँच सुविधा, रक्त सुविधा एवं परिवहन सुविधाएं निःशुल्क प्रदान की जा रही है। इससे संस्थागत प्रसव 71 प्रतिशत से बढ़कर 81 प्रतिशत हो गया है।

सभी प्रसूताओं एवं बीमार नवजात शिशुओं (शिशु को 30 दिवस तक) को सरकारी चिकित्सा संस्थाओं में सेवाऐं निःशुल्क उपलब्ध।

योजना के अन्तर्गत ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को 1400 रूपये एवं शहरी क्षेत्र की महिलाओं को 1000 रूपये की प्रोत्साहन राशि का भुगतान भी किया जा रहा है।

योजना के अंतर्गत 12 सितम्बर, 2011 से अब तक 22.08 लाख महिलाओं एवं 4.25 लाख नवजात शिशुओं को लाभान्वित किया गया।

मुख्यमंत्री शुभलक्ष्मी योजना लागू कर दिनांक 1 अप्रैल, 2013 व उसके पश्चात संस्थागत प्रसव से बालिका का जन्म होने पर 2100 रूपये तथा 1 वर्ष की आयु एवं टीकाकरण पूर्ण होने पर 2100 रूपये अतिरिक्त देय होंगे। बालिका की 5 वर्ष आयु होने व स्कूल में प्रवेश लेने पर 3100 रूपये की अतिरिक्त राशि देय होगी।

योजना प्रारम्भ होने से अब तक 94701 लाभार्थियों को प्रोत्साहन राशि के चेक वितरित किये जा चुके हैं।

मुख्यमंत्री पशुधन निःशुल्क दवा योजना

राजस्थान की ग्रामीण अर्थ व्यवस्था में पशुपालन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है एवं सीमान्त, उपसीमान्त तथा भूमिहीन कृषकों के रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण प्रभाव रखता है।

देश में पशुपालन के समृद्ध परम्पराओं के धनी राजस्थान के 1.21 करोड़ गायों, 1.11 करोड़ भैंसों, 2.15 करोड़ बकरियों, 1.11 करोड़ भेडों, 4.22 लाख ऊंटों एवं अन्य पशुओं के साथ कुल 5.67 करोड़ पशुधन है।

पशुओं के बीमार होने पर पशुपालकों को महंगी दवाइयां एवं महंगें ईलाज का सामना करना पड़ता है इससे वह कर्ज में डूब जाता है। ऐसे में पशुपालको के लिये समय पर दवाइयां सुलभ कराना पशुओं के जीवन की रक्षा ही नहीं करता है वरन पशु पालकों को आर्थिक सम्बल प्रदान कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में सहायक होगा।

इसी अवधारणा के साथ एवं मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना की आशातीत सफलता को देखते हुए सभी राजकीय पशु चिकित्सालयों में प्रदेश के पशुधन की चिकित्सा हेतु सर्वाधिक उपयोग में आने वाली आवश्‍यक दवाईयां निःशुल्क उपलब्ध कराने की दृष्टि से “मुख्यमंत्री पशुधन निःशुल्क दवा योजना’’ 15 अगस्त, 2012 से प्रारम्भ की गई है।

योजना के क्रियानवयन से गरीब कृषक/किसानों के द्वारा पशुधन की चिकित्सा पर होने वाले खर्च में कटौती होगी तथा पशुओं का समय पर उपचार हो सकेगा। बीमारियों के कारण पशुओं की उत्पादक क्षमता पर पड़ने पाले विपरीत प्रभाव में कमी आयेगी।

इस योजनान्तर्गत समस्त जिला स्तर पर जिला पशु औषधि भण्डार की स्थापना की जा कर औषधियों की उपलब्धता पशु चिकित्सा संस्था स्तर पर सुनिश्चित की गयी है।

समस्त पशु चिकित्सा संस्था स्तर पर पशु दवा वितरण केन्द्र स्थापित किये गये हैं। योजना के प्रथम चरण में में 87 औषधियों एवं 13 सर्जीकल/ड्रैसिंग मैटिरियल की उपलब्धता सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है। वर्तमान में 43 दवाईयां एवं 3 सर्जिकल कन्ज्युमेबल्स उपलब्ध कराये जा रहे हैं।

सभी 288 तहसीलो में एक-एक मोबाइल वेटरनरी यूनिट का संचालन कर पशुपालकों को उनके घर पर ही चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने हेतु व्यवस्था की जा रही हैं।

अब निःशुल्क औषधियों की संख्या को बढ़ा कर 110 किया जा रहा है।

15 अगस्त, 2012 से योजना के तहत अब तक 45.07 करोड़ रुपये व्यय करके 167.05 लाख पशु लाभान्वित हुए है।

सभी 288 तहसीलो में एक-एक मोबाइल वेटरनरी यूनिट का संचालन कर पशुपालकों को उनके घर पर ही चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने हेतु व्यवस्था की जा रही है।

मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक सम्बल योजना – राज्य के सहकारी दुग्ध उत्पादक संघों में दूध की आपूर्ति करने वाले पशुपालकों को अब राज्य सरकार द्वारा 2 रूपये प्रति लीटर की दर से अनुदान उपलब्ध कराया जायेगा।

75 करोड़ लीटर दुग्ध उत्पादन के परिप्रेक्ष्य में इस योजना पर वार्षिक 150 करोड़ रूपये का व्यय भार आयेगा।

1 अप्रेल, 2013 से 31 मई, 2013 तक (2 माह में) 23.14 करोड़ रुपये का अनुदान पशुपालकों को प्रदान किया गया।

मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना

’’मुख्यमन्त्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना’’ की शुरूआत राजस्थान में 3 जून, 2011 को यूपीए चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी के द्वारा बांसवाड़ा में की गई।

मुख्यमंत्री ग्रामीण बी.पी.एल. आवास योजना एवं इंदिरा आवास योजना में 3 वर्षो में 10 लाख ग्रामीण बीपीएल परिवारों को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी।

इन्दिरा आवास योजनान्तर्गत 01.04.2013 से आवास की देय राशि 45 हजार से बढ़ाकर 70 हजार कर दी गई है।

राज्य की स्वयं के स्रोतों पर आधारित यह अब तक की सर्ववृहद् योजना के प्रथम चरण में 1,19,176 आवासों का निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है एवं 1,56,524 आवासों का निर्माण कार्य पूर्णता के अन्तिम चरण में है।

इसके अतिरिक्त 3,23,786 आवासों का निर्माण कार्य इन्दिरा आवास योजना अन्तर्गत पूर्ण किया गया है।

मुख्यमंत्री शहरी बीपीएल आवास योजना

मुख्यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना की तर्ज पर शहरी क्षेत्र में ग़रीबजन के अपने घर के सपने को साकार करने के लिए ‘‘मुख्यमंत्री शहरी बीपीएल आवास योजना” के अन्तर्गत प्रतिवर्ष एक लाख बीपीएल परिवारों को आवास उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। यह पूरे देश में एक विशिष्ट पहल है।

प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित तथा सामाजिक दंगो आदि से प्रभावित लोगों के पुर्नवास हेतु राजस्थान विशेष आवास योजना दिनांक 31 अगस्त, 2012 से लागू की गई, जिसके अर्न्तगत क्षतिग्रस्त मकान के पुनर्निर्माण हेतु 55,000 रूपये (शौचालय के निर्माण सहित) एवं मरम्मत हेतु 25,000 रूपये की सहायता प्रदान की जायेगी। यह योजना ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रो में लागू की गई है।

योजना के अन्तर्गत 3018 व्यक्तियों को लाभान्वित कर रूपये 7 करोड़ की राशि वितरित की गई है।

योजना का मुख्य उद्धेश्य राज्य के शहरी क्षेत्रों के गरीबी रेखा के नीचे के अनुसूचितजाति/अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक वर्ग मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी धर्म एवं राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर घोषित अन्य वर्ग तथा अन्य वर्गों के परिवारों को वित्तीय सहायता देकर आवास की सुविधा उपलब्ध करवाया जाना है ।

इस योजना से राज्य के कुल लगभग 5 लाख बी.पी.एल. परिवारों में से 1 लाख आवासहीन परिवारों के आवास निर्माण का लक्ष्य इस वित्तीय वर्ष में रखा गया है।

इसके लिए राजस्थान आवास विकास एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, जयपुर (RAVIL) द्वारा हुडको/एनएचबी से ऋण लिया जाकर स्थानीय निकायों को उक्त ऋण उसी ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जायेगा, जिसका पुनर्भरण राज्य सरकार से प्राप्त होने वाले अतिरिक्त अनुदान से किया जा सकेगा।

अनुदान सहायता की राशि प्रति लाभार्थी 55 हजार प्रति इकाई की गयी।

योजना के अन्तर्गत 1.17 लाख आवासों की प्रशासनिक व 85400 आवासों की वित्तीय स्वीकृति जारी एवं 48328 आवास निर्माणाधीन है।

राजस्थान लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम-2011

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पण्डित जवाहर लाल नेहरू की जयन्ती 14 नवम्बर, 2011 से ‘राजस्थान लोक सेवाओं के प्रदान करने की गारन्टी अधिनियम-2011’ लागू किया गया है।

सुशासन की दृष्टि से आम जनता को राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, कार्यक्रमों एवं सेवाओं का लाभ निर्धारित समय सीमा में सुगमता से उपलब्ध कराने के लिए यह योजना शुरू की गई है।

इसी अधिनियम के तहत आम जनता से जुडे 18 विभागों की 153 सेवाओं को समयबद्ध एवं पारदर्शी रूप से उपलब्ध कराने की गारन्टी दी गई।

इन विभागों का कोई अधिकारी या कर्मचारी अधिनियम की परिधी में घोषित सेवाओं को निर्धारित समय सीमा में प्रदान नही करता है, तो कम से कम 500 रूपये से लेकर अधिकतम 5000 रूपये तक के आर्थिक दण्ड का प्रावधान किया गया है।

यदि वह सेवा प्रदान करने में अनावश्यक विलम्ब करता है तो प्रतिदिन 250 रूपये (अधिकतम 5000 रूपये) का आर्थिक दण्ड का प्रावधान किया गया है।

अधिनियम के लागू होने से अब तक 183.06 लाख आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 182.16 लाख आवेदनों को समयावधि में निस्तारित किया गया ।

अधिनियम अंतर्गत अब तक कुल 296 अपीलें दायर हुई है। इनमें से 273 अपीलों को निस्तारित किया गया एवं 3 प्रकरण में अधिनियम अंतर्गत आर्थिक दण्ड अधिरोपित किया गया है।

राजस्‍थान सुनवाई का अधिकार अधिनियम, 2012

भारत में पहली बार नागरिकों को सुनवाई का अधिकार राजस्थान सरकार द्वारा सुनवाई का अधिकार-2012 लाया जाकर प्रदान किया गया। इसे 1 अगस्त, 2012 में लागू कर दिया गया है। इससे राजस्थान लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2011 अधिक सशक्त होगा।

इस अधिनियम से आम जनता को उसके निवास स्थान के नजदीक सुनवाई का अवसर प्रदान करने की व्यवस्था की गई है। इस अधिनियम के तहत जन शिकायत या परिवाद पर 15 दिवस में सुनवाई की अनिवार्यता होगी। साथ ही शिकायत/परिवाद पर लिये गये निर्णय की संसुचना 7 दिवस में देने की अनिवार्यता भी सुनिश्चित की गई है।

अधिनियम के मुख्य बिन्दुः

  • शिकायताकर्ता के निवास स्थान के निकटतम स्थान पर सुनवाई की व्यवस्था।
  • इस अधिनियम के तहत जन शिकायत या परिवाद पर 15 दिवस में सुनवाई की अनिवार्यता/ साथ ही शिकायत/परिवाद पर लिये गये निर्णय की संसूचना 7 दिवस में देने की अनिवार्यता।
  • आवेदन पत्र एवं अपीलीय ज्ञापनों पर कोई शुल्क नहीं।
  • जन सामान्य की सहायता एवं मार्गदर्शन के लिए सूचना और सुगम केन्द्रों की स्थापना का प्रावधान।
  • ग्राम पंचायत, तहसील, उपखण्ड एवं जिला स्तर पर लोक सुनवाई अधिकारी एवं अपीलीय प्राधिकारियों की नियुक्ति।• जिला स्तर पर अतिरिक्त जिला कलक्टर, सम्बन्धित विभाग के जिला अधिकारी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, आयुक्त, नगर निगम/नगर परिषद की लोक सुनवाई अधिकारी के रूप में नियुक्ति।
  • जिला कलक्टर, रीजनल अधिकारी, मेयर, अध्यक्ष नगर परिषद/नगर पालिका की अपीलीय अधिकारी के रूप में नियुक्ति।
  • उपखण्ड एवं जिला स्तर पर गठित जन अभियोग एवं सतर्कता समितियों की उप समितियों को द्वितीय अपील सुनने का अधिकार।
  • प्रथम अपील पर निर्णय हेतु 21 दिवस की समय सीमा निर्धारित।
  • दर्ज शिकायत/परिवाद को विशिष्ट रजिस्ट्रीकरण संख्यांक (यूनिक नम्बर) दिये जाने तथा उसका इन्द्राज प्राप्त रसीद में करने की प्रणाली लागू।
  • शिकायत/परिवाद पर लिये गये निर्णय की सूचना 7 दिवस में देने की अनिवार्यता।
  • समय पर सुनवाई नहीं होने या निर्णय से असंतुष्ट रहने पर 30 दिवस में प्रथम अपील का प्रावधान।
  • अधिनियम के तहत किये गये विनिश्चय पर न्यायालय की अधिकारिता का वर्जन।
  • अधिनियम अंतर्गत अब तक 29,329 प्रकरण दर्ज हुए है एवं 27, 749 प्रकरणों का निस्तारण किया गया एवं 50 अपीलों में से 24 का निस्तारण किया गया।

मुख्यमंत्री ब्याज मुक्त फसली ऋण योजना

काश्तकारों के हित में ऐतिहासिक निर्णय लेकर अब समय पर ऋण चुकाने पर 1.50 लाख रुपये (एक लाख रुपये से बढ़ाकर) के सहकारी बैंकों के फसली ऋण को ब्याज मुक्त करने के लिए राज्य सरकार लगभग 500 करोड़ रुपये का अनुदान इस वर्ष देगी।

राज्य के केन्द्रीय सहकारी बैकों/प्राथमिक भूमि विकास बैकों/ग्राम सेवा सहकारी समितियों/ लैम्पस द्वारा वर्ष 2012-13 खरीफ एवं रबी फसल हेतु दिनांक 01.04.2012 से 31.03.2013 तक किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से वितरित अल्पकालीन फसली ऋण राशि समय पर/समयपूर्व फसली ऋण का चुकारा करने वाले कृषकों से कोई ब्याज वसूल नहीं किया जावेगा।

राजस्थान जन आधार योजना

18 दिसंबर 2019 को शुरू की गयी इस योजना का उद्देश्य राज्य के परिवारों की जनसांख्यिकीय एवं सामाजिक – आधार आर्थिक सूचनाओं का डेटाबेस तैयार कर प्रत्येक परिवार को “एक नम्बर एक कार्ड, एक पहचान प्रदान किया जाना है।

राज्य के सभी परिवार, पंजीयन कराने व जन-आधार कार्ड प्राप्त करने हेतु पात्र हैं।नामांकित प्रत्येक परिवार को एक 10 अंकीय परिवार पहचान संख्या सहित एकबारीयनिःशुल्क जन-आधार कार्ड प्रदान किया जा रहा है तथा इस कार्ड में मुखिया सहित प्रत्येक सदस्य की 11 अंकीय व्यक्तिगत पहचान संख्या भी अंकित की गई है।

भविष्य में सभी जन-कल्याण की योजनाओं के लाभ/ सेवाओं को इस कार्ड के आधार परहस्तांतरित किया जाएगा।

वर्तमान में सार्वजनिक वितरण, सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी 114 महत्त्वपूर्ण योजनाओं के लाभ हस्तांतरित किये जा रहे हैं।

राज्य सरकार शीघ्र ही NFSA / अन्त्योदय हेतु भी इसे मान्य दस्तावेज की संज्ञा दे रही है।

मुख्यमंत्री किसान मित्र उर्जा योजना

17 जूलाई 2021 को शुरू की गयी इस योजना के माध्यम से प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र के मीटर्ड एवं फ्लैट रेट श्रेणी के किसान उपभोक्ताओं को बिजली के बिल पर अनुदान प्रदान किया जाता है।

योजनान्तर्गत प्रतिमाह अधिकतम 1 हजार एवं प्रतिवर्ष अधिकतम 12 हजार अनुदान राशि दिये जाने का प्रावधान है।

योजना के अंतर्गत सभी मीटर्ड एवं फ्लैट रेट श्रेणी के कृषि उपभोक्ताओं को बिजली के बिलों में अधिकतम 1 हजार प्रतिमाह समायोजित किये जाते है किसी भी माह में बिल राशि 1 हज़ार रूपये से कम होने पर अनुदान की शेष राशि का लाभ उसी वित्तीय वर्ष के आगामी माह में समायोजित किया जायेगा योजना का लाभ सभी किसान उपभोक्ताओं को मई 2021 से मिलना आरंभ हो गया है।

योजना के क्रियान्वयन के लिए सरकार द्वारा 1450 करोड़ रूपये प्रतिवर्ष वहन किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना

1 मई 2021 से शुरू की गयी मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना में प्रदेश के प्रत्येक परिवार को 5 लाख रूपये तक का स्वास्थ्य बीमा दिया जा रहा है।

योजनान्तर्गत अस्पताल में भर्ती होने के 5 दिन पहले एवं 15 दिन बाद तक का उपचार व्यय शामिल है।

योजना में साधारण बीमारियों हेतु 50 हजार रूपये तथा गम्भीर बीमारियों हेतु 4.50 लाख की राशि का बीमा कवर प्रतिवर्ष प्रति परिवार देय है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में चयनित परिवार तथा सामाजिक, आर्थिक एवं जाति आधारित जनगणना 2011 के अन्तर्गत पात्र परिवार इसके अतिरिक्त समस्त विभागों में कार्यरत संविदा कार्मिक, लघु एवं सीमान्त कृषकों तथा कोविड- 19 अनुग्रह राशि प्राप्त परिवारों को निःशुल्क एवं शेष परिवार प्रीमियम को 50 प्रतिशत ( 850 रूपये प्रति परिवार प्रति वर्ष ) का भुगतान कर इस योजना में शामिल हो सकते हैं।

योजना में अब तक 772 राजकीय एवं 521 निजी चिकित्सालय संबद्ध हैं जिनके माध्यम से प्रदेश के 2 लाख 66 हजार लाभार्थियों को निःशुल्क इलाज से लाभान्वित किया जा चुका है तथा 340 करोड़ 56 लाख के क्लेम सबमिट किये जा चुके हैं।

जन सूचना पोर्टल – 2019

सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 की मूल भावना से प्रेरित होकर राज्य सरकार द्वारा 13 सितंबर 2019 को जन सूचना पोर्टल-2019 का लोकार्पण किया गया।

वर्तमान में 115 विभागों की 253 योजनाओं / सेवाओं को शामिल किया गया है।आमजन द्वारा सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी जन सूचना पोर्टल-2019 https//jansoochna.rajasthan.gov.in, मोबाईल एप तथा सेल्फ सर्विस ई-मित्र प्लस कियोस्क के माध्यम से प्राप्त की जा रही है।

योजना के अंतर्गत अभी तक 7 करोड़ 76 लाख से ज्यादा जानकारियां वेबसाईट के माध्यम से प्राप्त की गई।

इन्दिरा रसोई योजना

  • विभाग का नाम – स्थानीय निकाय विभाग
  • योजना प्रारम्भ : 20-08-2020
  • अवधि तक मान्य : 36 माह
  • वित्त पोषित : राज्य
  • योजना का प्रकार : सामूहिक

माननीय मुख्यमंत्री महोदय, राजस्थान सरकार ने ’’कोई भूखा ना सोये’’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक और कदम बढाते हुए दिनांक 20.08.2020 से प्रदेश की सभी नगरीय निकायों में इन्दिरा रसोई योजना की शुरूआत की थी। 

योजना का प्रमुख उद्देश्य जरूरतमंद व्यक्तियों को सस्ती दरों पर सम्मानपूर्वक बिठाकर स्थानीय स्वादानुसार दो समय का शुद्ध व पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाना है। 

इन्दिरा रसोई की स्थापना हेतु जिला स्तरीय समिति द्वारा, नगर निकायों के सामुदायिक भवन, रेल्वे एवं बस स्टेशन, अस्पताल, मण्डी, चौकडी आदि अधिक जनसंख्या घनत्व वाले स्थानों पर नगर निकायों के  आश्रय स्थलों, अम्बेडकर भवनों, सामुदायिक भवनों एवं एनजीओ के रिक्त भवनों में निशुल्क की गई है। 

योजनान्तर्गत 213 नगर निकायों में 358 स्थायी रसोईयों के संचालन हेतु जिलास्तरीय समन्वय एवं मॉनिटरिंग समिति द्वारा सेवाभावी संस्थाओं/एनजीओ का चयन किया गया है, जिनके माध्यम से दोपहर एवं रात्रि  भोजन उपलब्ध करवाया जाकर योजना के दिषा निर्देषानुसार प्रतिदिन 1.34 लाख (4.87 करोड़ प्रतिवर्ष) से अधिक व्यक्तियों को लाभान्वित किया जाएगा, जिस पर प्रथम वर्ष में 94.56 करोड रूपये तत्पश्चात आधारभूत व्यय की एकमुष्त राषि को कम करने के बाद प्रतिवर्ष लगभग रूपये 76.96 करोड का व्यय संभावित है।

रसोईयों का निर्धारण – इन्दिरा रसोई योजनान्तर्गत 213 नगर निकायों में 358 स्थायी रसोईयों की स्थापना की गई है जिसमें नगर निगम क्षेत्रों में 87 रसोईयां (जयपुर-20, जोधपुर-16, कोटा-16, अजमेर-10, बीकानेर-10, उदयपुर-10 एवं भरतपुर-5), नगर परिषद क्षेत्रों में (कुल 34 नगर परिषद) में 3 रसोई प्रति नगर परिषद एवं प्रत्येक नगर पालिका क्षेत्र (कुल 169 नगर पालिका) में 01 रसोई प्रति नगर पालिका संचालित की जा रही है। 

खाने की संख्या – नगर निगम क्षेत्र में प्रति रसोई 300 थाली लंच एवं 300 थाली डिनर तथा नगर परिषद/नगर पालिका क्षेत्र में प्रति रसोई 150 थाली लंच एवं 150 थाली डिनर दिए जाने का प्रावधान है, लेकिन राज्यस्तरीय समिति की अनुषंषा पर भोजन की संख्या में आवष्यकतानुसार वृद्धि की जा सकेगी। 

भोजन का मैन्यू – इन्दिरा रसोई योजनान्तर्गत भोजन में चपाती, दाल, सब्जी एवं अचार सम्मिलित किया गया है तथा स्थानीय समिति द्वारा आवष्यकतानुसार मैन्यू में स्थानीय स्वादानुसार परिवर्तन किया जा सकेगा। भोजन में प्रति थाली 100 ग्राम दाल, 100 ग्राम सब्जी, 250 ग्राम चपाती एवं अचार दिए जाने का प्रावधान है। 

लाभार्थी अंशदान – योजनान्तर्गत भोजन हेतु लाभार्थी से 8 रुपये प्रति थाली लिए जाने का प्रावधान है। 

अनुदान राशि – रसोई संचालक को भोजन वितरण पर राज्य सरकार द्वारा 12 रुपये प्रति थाली अनुदान के रूप में देय होगा।  

भोजन का समय – योजनान्तर्गत दोपहर का भोजन प्रातः 8ः30 से दोपहर 2ः00 एवं रात्रिंकालीन भोजन सायं 5ः00 बजे से 8.00 बजे तक उपलब्ध कराने का प्रावधान है किन्तु जिलास्तरीय समिति द्वारा अपने स्तर पर अथवा सर्दी एवं गर्मी के मौसम में आवष्यकतानुसार परिवर्तन किया जा सकेगा।

डोनेषन – योजनान्तर्गत कोई भी दानदाता अपने परिजनों की वर्षगांठ जन्मदिन या अन्य किसी उपलक्ष्य में दोपहर/रात्रि अथवा दोनों समय का भोजन प्रायोजित कर सकते हैं। भोजन की लागत मूल्य का भुगतान प्रायोजक सम्बन्धित रसोई में  जमा करवाकर निशूल्क भोजन करा सकता है। इस हेतु प्रायोजक को ऑनलाईन पोर्टल से जमा राषि की रसीद प्राप्त होगी एवं कूपन पर प्रायोजक का नाम अंकित होगा। साथ ही कोई भी दानदाता जिलास्तरीय मॉनिटरिंग समिति को भी दान दे सकता है। 

घर घर औषधि योजना

  • विभाग का नाम – वन विभाग
  • योजना प्रारम्भ : 01/08/2021
  • अवधि तक मान्य : 60 माह
  • वित्त पोषित : राज्य
  • योजना का प्रकार : पारिवारिक, व्यक्तिगत

घर-घर औषधि योजना के तहत राज्य के सभी परिवारों को चार चुनिंदा औषधीय जड़ी-बूटियों के पौधे उपलब्ध कराएगी।सरकार की मेगा योजना का लक्ष्य राज्य में रहने वाले सभी 1,26,50,000 परिवारों तक पहुंचना है। उन्हें इस अभियान के तहत चार औषधीय जड़ी-बूटियों के पौधे (तुलसी, अश्वगंधा, गिलोय और कालमेघ) दिए जाएंगे।

महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूल

  • विभाग का नाम – माध्यमिक शिक्षा
  • योजना प्रारम्भ : 19-06-2019
  • वित्त पोषित : राज्य
  • योजना का प्रकार : व्यक्तिगत

महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूल राज्य में सरकारी विद्यालयों में छात्रों को अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा की सुविधा के लिए योजना शुरू की गई थी ताकि निजी स्कूलों में भारी फीस के बोझ को नकारा जा सके और समाज के निचले स्तर के छात्रों को सरकारी स्कूल में अंग्रेजी माध्यम में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।  

यह योजना केवल दो शैक्षणिक सत्र पुरानी है और अभी भी विस्तार के चरण में है क्योंकि माता-पिता का जनहित बहुत उत्साहजनक है।  

यहां तक ​​कि सरकार ने गुणवत्ता वाले संकायों से इष्टतम संसाधनों का निवेश करने का निर्णय लिया है जो अंग्रेजी माध्यम में कुशलता से पढ़ा सकते हैं।  

राज्यों में जिला और ब्लॉक स्तर पर 205 अंग्रेजी माध्यम स्कूल चल रहे हैं।  जिसकी संभावना है कि हम अगले आने वाले दो वर्षों में 1200 और बढ़ा दें।  

अब सरकार ने 348 और सरकारी स्कूलों को महात्मा गांधी सरकारी स्कूल (अंग्रेजी माध्यम) में बदलने का फैसला किया है।  ये स्कूल शैक्षणिक सत्र 2021-22 से शुरू होंगे।

मुख्यमंत्री वृद्धजन सम्मान पेंशन योजना

  • विभाग का नाम – सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग
  • वित्त पोषित : राज्य
  • योजना का प्रकार : व्यक्तिगत

55 वर्ष या इससे अधिक आयु की महिला तथा 58 वर्ष या इससे अधिक आयु का पुरूष जो राजस्थान का मूल निवासी हो तथा राजस्थान में रह रहा हो, एवं जिसके जीवन निर्वाह हेतु स्वयं एवं पत्नी/पति की नियमित आय का स्त्रोत नहीं हो, अथवा प्राथी एवं पत्नी/पति की समस्त स्त्रोतों से कुल वार्षिक आय रूपये 48000/- से कम हो, को पेंशन देय है। बी.पी.एल./ अंत्योदय/  आस्थाकार्डधारी परिवार/ सहरिया/ कथौड़ी, खैरवा जाति के व्यक्तियों को आय संबंधी शर्त से छूट प्रदान की गई है।

2 अक्टूबर 2021 से पेंषन योजना के लिये जन आधार पोर्टल पर उपलब्ध मेटा डेटा का उपयोग करते हुए बिना मानवीय हस्तक्षेप के ऑनलाइन प्राप्त आवेदनों की स्वतः स्वीकृति जारी की जाने की प्रक्रिया प्रारम्भ की गई।

मुख्यमंत्री विशेष योग्यजन सम्मान पेंशन योजना

  • विभाग का नाम – सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग
  • योजना प्रारम्भ : 29-11-1965
  • वित्त पोषित : राज्य
  • योजना का प्रकार : व्यक्तिगत

किसी भी आयु का विशेष योग्यजन व्यक्ति जो अंधता, अल्पष्टि, चलन नि:शक्तता, कुष्ठ रोग मुक्त, श्रवण शक्ति का हृास, मानसिक मंदता, मानसिक रोगी में से किसी एक अथवा अधिक विकलांगता (40 प्रतिशत एवं अधिक विकलांगता) से ग्रसित हो, प्राकृतिक रूप से बौनेपन (वयस्क व्यक्ति के मामलों में ऊंचाई 3 फीट 6 इंच से कम हो एवं प्राधिकृत चिकित्सा अधिकारी के द्वारा प्रदत्त प्रमाण पत्र धारक हो) से ग्रसित हो तथा प्राकृतिक रूप से हिजड़ेपन से ग्रसित हो, जो राजस्थान का मूल निवासी हो तथा राजस्थान में रह रहा हो, एवं जिसकी स्वयं की सम्मिलित वार्षिक आय (समस्त स्त्रोतों से) रूपये 60000/- तक हो, पेंशन का पात्र होगा।

2 अक्टूबर 2021 से पेंषन योजना के लिये जन आधार पोर्टल पर उपलब्ध मेटा डेटा का उपयोग करते हुए बिना मानवीय हस्तक्षेप के ऑनलाइन प्राप्त आवेदनों की स्वतः स्वीकृति जारी की जाने की प्रक्रिया प्रारम्भ की गई।

शुद्ध के लिए युद्ध

  • विभाग का नाम – चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य विभाग
  • वित्त पोषित : राज्य

अभियान को दिनाक 14.10.2020 से निरंतंर समस्त प्रदेश में लागू किया गया है. अभियान के अंतर्गत सभी प्रकार के खाद्य पदार्थो में मिलावट हेतु जाँच की जाती है. मिलावट पाए जाने पर नियमानुसार कारर्वाई की जाती है. खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 एवं विनियम 2011 के अनतर्गत

मुख्यमंत्री युवा सम्बल योजना 21

  • विभाग का नाम – कौशल, नियोजन एवं उद्यमिता (रोजगार निदेशालय)
  • योजना प्रारम्भ : 1 जनवरी, 2022
  • वित्त पोषित : राज्य
  • योजना का प्रकार : व्यक्तिगत

राज्य सरकार की बजट घोषणा 2021-22 में समाहित बिन्दु संख्या 56 के अनुसरण में पूर्व से संचालित ’’मुख्यमंत्री युवा सम्बल योजना-2019’’ को और बेहतर बनाते हुए राजस्थान राज्य में स्नातक बेरोजगार आषार्थियों को बेरोजगारी भत्ता देने एवं योजना को कौषल व रोजगार से जोड़ने हेतु ’’मुख्यमंत्री युवा सम्बल योजना-2021’’ के दिशा – निर्देश स्पष्ट किये जाते हैंः-

➤नाम:- यह योजना ’’मुख्यमंत्री युवा सम्बल योजना-2021’’ कहलाएगी।➤प्रचार/विस्तार:- यह योजना सम्पूर्ण राजस्थान राज्य में लागू होगी।➤प्रारम्भ होने की तिथि:- यह योजना 1 जनवरी, 2022 से लागू होगी।➤योजना:-’’मुख्यमंत्री युवा सम्बल योजना-2021’’

निरोगी राजस्थान

  • विभाग का नाम – चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य विभाग
  • योजना प्रारम्भ : 17-12-2019
  • वित्त पोषित : राज्य
  • योजना का प्रकार : सामूहिक

निरोगी राजस्थान प्रदेश में स्वस्थ्य हेतु 17 दिसम्बर 2019 को पहला सुख निरोगी काया के उद्देश्य से अभियान की शुरुआत की गई. अभियान का उद्देश्य बुजुर्गो महिलाओं तथा बच्चों उचित देखभाल प्रदान करने के साथ साथ संचारी तथा गैर संचारी बीमारीयों, टीकाकरण और नशा मुक्ति, खाद्य असुरक्षा  जैसी समस्याओ के लिए बेहतर सेवाये प्रदान करना है।

राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय एवं कृषि निर्यात प्रोत्साहन योजना 2019

विभाग का नाम – राजस्‍थान स्‍टेट कृषि विपणन बोर्ड

योजना प्रारम्भ : 12-12-2019

अवधि तक मान्य : 31-Mar-2024

वित्त पोषित : राज्य

योजना का प्रकार : व्यक्तिगत

उद्देश्य: योजना का मुख्य उद्देश्य प्रसंस्करण के स्तर को बढ़ाना, अपव्यय में कमी, मूल्यवर्धन, किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ निर्यात में वृद्धि करना है जिससे कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र का समग्र विकास हो सके।  इस योजना में राज्य में नई कृषि और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के साथ-साथ विस्तार और विविधीकरण और मौजूदा इकाइयों के आधुनिकीकरण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने की परिकल्पना की गई है।

राजस्‍थान निवेश प्रोतसाहन 2019

विभाग का नाम – आयुक्‍त उद्योग, वाणिज्‍य एवं सी.एस.आर.

योजना प्रारम्भ : 17-12-2019

अवधि तक मान्य : 31-Mar-2026

वित्त पोषित : राज्य

योजना का प्रकार : व्यक्तिगत

राजस्‍थान  को भारत के सर्वोतम निवेश गंतव्‍य के रूप में स्थापित करने हेतु तथा रोजगार केे अवसर सृजित  करने के उददेश्‍य से राज्‍य सरकार द्वारा 17  दिसंबर 2019  को राजस्‍थान निवेश प्रोत्‍साहन योजना जारी की गई  

देवनारायण छात्रा स्कूटी वितरण एवं प्रोत्साहन राशि योजना

विभाग का नाम – उच्‍च शिक्षा विभाग 

योजना प्रारम्भ : 2011-12

वित्त पोषित : राज्य

योजना का प्रकार : व्यक्तिगत

राजस्थान में अति पिछडे वर्ग 1. बंजारा, बालदिया, लबाना 2. गाडिया-लोहार, गाडोलिया 3. गूजर, गुर्जर 4. राईका, रैबारी (देबासी, देवासी)5. गडरिया,(गाडरी), गायरी,की छात्राओं को राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड/केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित 12वीं कक्षा की परीक्षा तथा विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित स्नातक/स्नातकोत्तर डिग्री परीक्षाओं में अधिक से अधिक अंक लाने, उनमें प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने, उच्च अध्ययन हेतु आकर्षित करने एवं उच्च शिक्षा हेतु वाहन सुविधा उपलब्ध कराने तथा आर्थिक सहयोग प्रदान करना है।

काली बाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना

विभाग का नाम – उच्‍च शिक्षा विभाग 

योजना प्रारम्भ : 2015-16

अवधि तक मान्य : 12 माह

वित्त पोषित : राज्य

योजना का प्रकार : व्यक्तिगत

राजस्थान राज्य की मेधावी छात्राओं को राजकीय विद्यालयों में कक्षा 9वीं से कक्षा 12वीं तक नियमित छात्रा के रूप में प्रवेश लेकर अध्ययन करने हेतु प्रेरित करना, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान द्वारा आयोजित परीक्षा तथा विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित स्नातक डिग्री परीक्षा में अधिक से अधिक अंक लाने, उनमें प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने, उच्च अध्ययन हेतु आकर्षित करने एवं उच्च शिक्षा हेतु वाहन सुविधा उपलब्ध कराना है ।

इंदिरा गांधी शहरी क्रेडिट कार्ड योजना 2021

विभाग का नाम – स्थानीय निकाय विभाग

योजना प्रारम्भ : 06 Aug 2021

अवधि तक मान्य : 31-Mar-2022

वित्त पोषित : राज्य सरकार : 100%

केन्द्रीय सरकार : 0%

योजना का प्रकार : व्यक्तिगत

पालनहार योजना

विभाग का नाम – सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग

योजना प्रारम्भ : 2004

वित्त पोषित : राज्य

योजना का प्रकार : व्यक्तिगत

अनाथ बच्चों के पालन पोषण, शिक्षा आदि की व्यवस्था संस्थागत नहीं की जाकर समाज के भीतर ही बच्चे के निकटतम रिश्तेदार/परिचित व्यक्ति/वयस्क भाई अथवा बहिन को पालनहार बनाकर राज्य की ओर से आर्थिक सहायता देना।

मुख्यमंत्री कन्यादान योजना

विभाग का नाम – सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग

वित्त पोषित : राज्य

योजना का प्रकार : पारिवारिक

सहयोग योजना एवं विधवा महिलाओं की पुत्री के विवाह पर सहायता योजना का एकीकरण, सहयोग एवं उपहार योजना संचालन नियम 2015, जारी किये गये।

सिलिकोसिस नीति

विभाग का नाम – विशेष योग्‍यजन निदेशालय

योजना का प्रकार : सामूहिक

उद्घाटन – 3 अक्टूबर 2019

सिलिकोसिस नीतिः- राज्य सरकार द्वारा 3 अक्टूबर 2019 को सिलिकोसिस नीति का उद्द्याटन किया है उक्त नीति में खदानों, फैक्ट्रियों, पत्थर तोड़ने, पत्थर पिस कर पाउडर बनाने, गिटि बनाने, सेण्ड स्टोन से मूर्ति बनाने इत्यादि कार्यो से श्रमिक धूल के सम्पर्क में आने से सिलिकोसिस जैसी लाईलाज बिमारी से पीड़ित हो जाता है। इस नीति में सिलिकोसिस पीड़ित व्यक्ति को आर्थिक मदद के साथ-साथ ऐसे कार्य स्थल एंव श्रमिकों की पहचान, पुनर्वास, बीमारी की रोकथाम व निंयत्रण के उपाय अपनाये जाते है। 

मुख्यमंत्री एकलनारी सम्मान पेंशन योजना

विभाग का नाम – सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग

योजना प्रारम्भ : 01-06-1974

वित्त पोषित : राज्य

योजना का प्रकार : व्यक्तिगत

18 वर्ष या अधिक आयु की विधवा /परित्यक्ता / तलाकशुदा महिला, जो राजस्थान की मूल निवासी हो तथा राजस्थान में रह रही हो, एवं जिसके जीवन निर्वाह हेतु स्वयं की नियमित आय का कोई  स्त्रोत नहीं हो, अथवा प्राथी की समस्त स्त्रोतों से कुल वार्षिक आय रूपयं 48000/- से कम हो, को पेंशन देय है।

बी.पी.एल. / अंत्योदय / आस्था कार्डधारी परिवार / सहरिया / कथौड़ी / खैरवा जाति एवं एचआईवी एड्स पॉजिटिव हो तथा राजस्थान राज्य एड्स कंट्रोल सोसायटी में पंजीकृत है ऐसी विधवा / परित्यकता / तलाकशुदा महिलाओं को आय संबंधी शर्त में छूट प्रदान की गई है।

2 अक्टूबर 2021 से पैंशन योजना के लिये जन आधार पोर्टल पर उपलब्ध मेटा डेटा का उपयोग करते हुए बिना मानवीय हस्तक्षेप के ऑनलाइन प्राप्त आवेदनों की स्वतः स्वीकृति जारी की जाने की प्रक्रिया प्रारम्भ की गई।

इंदिरा गाँधी मातृत्व पोषण योजना

विभाग का नाम – समेकित बाल विकास सेवा योजना (आईसीडीएस)

योजना प्रारम्भ : 19/11/2020

वित्त पोषित : राज्य

योजना का प्रकार : व्यक्तिगत

इंदिरा गांधी मातृत्व पोषण योजना राजस्थान में गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं तथा तीन वर्ष तक की आयु के बच्चों में पोषण की स्थिति को सुधारने के लिए सशर्त मातृत्व सहयोग (Conditional Maternity Benefit) और पोषण परामर्श पर आधारित योजना है।

प्रथम चरण – प्रथम चरण के अंतर्गत राजस्थान सरकार द्वारा बजट घोषणा 2020-21 की पालना में दिनांक 19.11.2020 से, इंदिरा गांधी मातृत्व पोषण योजना राज्य के पाँच जनजातीय जिलों – प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, उदयपुर और बारां में लागू की गयी है।

द्वितीय चरण – द्वितीय चरण के अंतर्गत राजस्थान सरकार द्वारा वर्ष 2022-23 में योजना का दायरा बढ़ाते हुए राज्य के सभी 33 जिलों में लागू करने की घोषणा की गई ।

योजनान्तर्गत द्वितीय संतान हेतु गर्भधारण करने वाली महिलाओं को, निर्धारित शर्तों के पूर्ण होने पर निम्नानुसार पाँच किश्तों में 6,000 रूपये की नकद सहयोग राशि सीधे उनके खातों में जमा की जावेगी :-

पहली किश्त – 1000 रूपये 

दूसरी किश्त – 1000 रूपये 

तीसरी किश्त – 1000 रूपये 

चौथी किश्त – 2000 रूपये 

पाँचवी किश्त – 1000 रूपये 

एम.एस.एम.ई. एक्ट-स्व प्रमाणीकरण

  • विभाग का नाम – निवेश संवर्धन ब्यूरो (बीप)
  • योजना प्रारम्भ : 17 जुलाई, 2019
  • वित्त पोषित :राज्य सरकार : 60%
  • केन्द्रीय सरकार : 40%
  • योजना का प्रकार : व्यक्तिगत, सामूहिक

एम. एस. एम. ई. अधिनियम- स्व प्रमाणीकरण- प्रदेश में एम.एस.एम.ई. इकाइयों की सरल स्थापना एवं विकास हेतु राज्य सरकार द्वारा 17 जुलाई, 2019 को राजस्थान सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (स्थापना और प्रवर्तन का सुकरीकरण) अधिनियम लागू किया गया।

इसके तहत उद्यमी को 3 वर्ष तक राजस्थान के अधिनियमों के अन्तर्गत विभिन्न विभागों की किसी प्रकार की स्वीकृति एवं निरीक्षण की आवश्यकता नहीं है। इस हेतु एक ऑनलाईन पोर्टल rajudyogmitra.rajasthan.gov.in शुरू किया गया है।

ऑनलाइन पोर्टल पर उद्यमी के आवेदन के पश्चात आवेदन प्राप्ति का प्रमाण-पत्र उसी समय जारी कर दिया जाता है। योजना के अंतर्गत प्रारम्भ से आदिनांक तक 11 हजार 333 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम औद्यौगिक इकाइयों का पंजीयन हो चुका है।

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